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जोधपुर में हाई कोर्ट जजों के बंगले वाली जमीन पर वक्फ बोर्ड का दावा, कोर्ट ने मांगा जवाब

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राजस्थान के जोधपुर से वक्फ बोर्ड के दावे को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। वक्फ बोर्ड ने उस जमीन को अपनी संपत्ति बताया है, जिस पर राजस्थान हाई कोर्ट के दो जजों के सरकारी बंगले, गीता भवन, कई स्कूल-कॉलेज और चार मंदिर मौजूद हैं। इस दावे के बाद पूरे इलाके में विवाद गहरा गया है और राजस्थान हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है।

नगर निगम के रिकॉर्ड में सरकारी जमीन, वक्फ ने बताया अपनी संपत्ति

जानकारी के अनुसार, जिस जमीन पर विवाद खड़ा हुआ है, वह राजस्व रिकॉर्ड में नगर निगम के नाम दर्ज है। हालांकि, सरकार के उम्मीद पोर्टल और वक्फ बोर्ड के गजट में इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है। इसी वजह से यह मामला अब कानूनी विवाद का रूप ले चुका है।

हाई कोर्ट ने मांगा 14 दिन में जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, वक्फ मंत्रालय, राजस्व विभाग और जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर 14 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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250 साल पुराने इलाके पर कब्रिस्तान होने का दावा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जोधपुर का एक प्रतिष्ठित और लगभग 250 वर्ष पुराना रिहायशी इलाका है। यहां लंबे समय से लोग रह रहे हैं, जबकि वक्फ बोर्ड का दावा है कि यह भूमि कब्रिस्तान से जुड़ी वक्फ संपत्ति है। इस दावे के बाद इलाके के लोगों में चिंता बढ़ गई है।

वक्फ बोर्ड की सफाई, पूरे इलाके पर नहीं सिर्फ 14.77 हेक्टेयर पर दावा

विवाद बढ़ने के बाद राजस्थान वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट और राज्य सरकार के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। बोर्ड का कहना है कि उसने पूरे इलाके पर नहीं, बल्कि केवल 14.77 हेक्टेयर भूमि पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था को इस दावे पर आपत्ति है तो वह कानून के तहत अपने दस्तावेज और सबूत पेश कर सकती है। वक्फ के मुतवल्ली ने भी कहा कि जिस किसी को आपत्ति है, वह संबंधित मंच पर अपने प्रमाण प्रस्तुत करे।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

विवादित जमीन पर रहने वाले लोगों ने वक्फ बोर्ड के दावे का विरोध किया है। उनका कहना है कि दशकों से इस भूमि पर घर, धार्मिक स्थल और सार्वजनिक संस्थान मौजूद हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि यह वक्फ संपत्ति थी तो पिछले 61 वर्षों तक बोर्ड ने इस पर कोई दावा क्यों नहीं किया।

गीता भवन पर भी दावा, पुराने सरकारी रिकॉर्ड का हवाला

विवादित क्षेत्र में स्थित गीता भवन भी इस दावे के दायरे में बताया जा रहा है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1995 के सरकारी गजट में यह संपत्ति गीता भवन के नाम दर्ज है, जबकि 1965 में नगर निगम द्वारा इसका पट्टा भी जारी किया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि वक्फ बोर्ड इस भूमि पर किस आधार पर दावा कर रहा है।

भाजपा विधायक ने पिछली सरकारों को ठहराया जिम्मेदार

जोधपुर के भाजपा विधायक अतुल भंसाली ने इस पूरे मामले को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों की कथित मिलीभगत के कारण वक्फ बोर्ड ने कई जमीनों पर दावा किया, लेकिन अब ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।

वक्फ कानून में बदलाव के बाद कोर्ट में होगा फैसला

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में वक्फ से जुड़े विवादों को देखते हुए वक्फ कानून में बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब केवल दावा कर देने से कोई संपत्ति स्वतः वक्फ की नहीं मानी जाएगी। वक्फ संपत्तियों का विधिवत पंजीकरण आवश्यक है और यदि किसी दावे पर विवाद होता है तो उसका अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा। ऐसे में जोधपुर का यह मामला भी अब न्यायिक प्रक्रिया से गुजरेगा, जहां दस्तावेजों और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर यह तय होगा कि विवादित भूमि पर वास्तविक अधिकार किसका है।

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