नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। इस बीच CJP ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकती है।
प्रदर्शन के बाद जांच और कानूनी कार्रवाई जारी
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और पुलिस के साथ झड़प के आरोपों की जांच जारी है। दिल्ली पुलिस विभिन्न वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की भूमिका कानून के उल्लंघन में सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर प्रदर्शन से जुड़े ऐसे पोस्ट और वीडियो हटाने को कहा है, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि उनमें भ्रामक जानकारी या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली सामग्री साझा की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच साइबर स्तर पर भी की जा रही है।
गृह मंत्री ने की उच्चस्तरीय बैठक
प्रदर्शन के बाद आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में आंतरिक सुरक्षा, एजेंसियों के समन्वय और संवेदनशील मामलों से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई।
CJP ने दोबारा आंदोलन के दिए संकेत
CJP का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के संबंध में उनकी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। संगठन ने कहा है कि यदि कार्रवाई जारी रहती है तो वह आगे की रणनीति तय करेगा और जरूरत पड़ने पर फिर से आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि जिन मामलों में कानून का उल्लंघन हुआ है, उनमें कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही होगी।
संसद में भी उठा मुद्दा
जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़े पुलिस एक्शन का मुद्दा संसद में भी गूंजा। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा या कानून-व्यवस्था भंग करने के मामलों में पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।
जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष आना बाकी
प्रदर्शन के दौरान हिंसा, कथित आपत्तिजनक नारों, सोशल मीडिया पोस्ट और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों की जांच अभी जारी है। कई दावे और आरोप विभिन्न पक्षों की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।