20 अप्रैल को मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है जिसके अंदर आरएसएस यानि की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को नागपुर स्थित संघ कार्यालय को दी जा रही Z प्लस सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे थे. याचिका में यहां तक मांग की जा रही थी कि इस सुरक्षा पर होने वाला खर्च करदाताओं के पैसे से ना उठाकर रस या उससे जुड़े हुए व्यक्तियों से वसूला जाए.
ऐसे में मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनिल कपूर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान ही कितने भी जारी कर दी है की याचिका किसी विशेष उद्देश्य से दायर हुई प्रतीत हो रही है इसी आधार आधार पर इस याचिका से सिरे से खारिज कर दिया है.
ऐसे में नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता लग्न किशोर सिंह के द्वारा दायर की गई इस याचिका केंद्र कहा जा रहा है कि आरएसएस एक गैर पंजीकृत संगठन है और इन सब के बावजूद उसे और उसके प्रमुख को राज्य की तरफ से z प्लस सुरक्षा दी जा रही है जहां खर्च आम करदाताओं के पैसे से उठाया जा रहा है.
यहां तक की याचिका करता नहीं मांग सकती थी कि इन सुरक्षा व्यवस्था पर हर महीने होने वाला खर्च 40 से 45 लख रुपए तक का है यह खर्च आरएसएस और उससे जुड़े हुए व्यक्तियों से ही वसूला जाए ऐसे में 27 फरवरी 2023 को इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुकेश अंबानी की सुरक्षा से जुड़ी मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दे दिया।
उस फैसले में कहा गया था कि विशेष परिस्थितियों में दी जाने वाली सुरक्षा का खर्च संबंधित व्यक्ति या संगठन से ही वसूला जा सकता है याचिका करता ने अश्विन इंगोले में दलील दी है कि जब सुरक्षा संवैधानिक या वैधानिक अनिवार्य अनिवार्यता के तहत नहीं दी जा रही हो तब उसका खर्च सार्वजनिक खजाने से नहीं बल्कि लाभार्थियों से लिया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?
हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले के मुख्य पॉलिसी पहलुओं पर कोई कमेंट नहीं किया। उसने बस इस बात पर ज़ोर दिया कि पिटीशन के पीछे का मकसद संदिग्ध लग रहा था और इस आधार पर इस पर सुनवाई करने से मना कर दिया। Z+ सिक्योरिटी देश में दी जाने वाली सबसे ऊंचे लेवल की सिक्योरिटी में से एक है, जिसमें कई लेवल पर हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं।
यह सिक्योरिटी आम तौर पर उन लोगों को दी जाती है जिन्हें बड़ा खतरा माना जाता है। इस फैसले से कोर्ट ने साफ कर दिया कि सिर्फ पब्लिक इंटरेस्ट का दावा करना काफी नहीं है; पिटीशन का इरादा और आधार भी उतने ही ज़रूरी हैं।
सरकार को बड़ी राहत
कोर्ट के इस फैसले से सरकार और RSS को बड़ी राहत मिली है। पिटीशन खारिज होने का मतलब है कि मोहन भागवत और RSS ऑफिस के लिए मौजूदा सिक्योरिटी व्यवस्था बनी रहेगी, और इसका खर्च सरकारी खजाने से उठाया जाएगा। फिलहाल, RSS चीफ मोहन भागवत और नागपुर में RSS ऑफिस को दी गई Z+ सिक्योरिटी जारी रहेगी।






