ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उत्पन्न तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसका असर अब भारत में भी महसूस किया जा रहा है । हाल ही में आंध्र प्रदेश के कई पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कमी की खबरें सामने आईं, जिसके बाद बड़ी संख्या में पंप बंद कर दिए गए और लोगों के बीच पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) का माहौल बन गया ।
संकट के प्रमुख कारण और स्थिति
आंध्र प्रदेश में उत्पन्न हुए इस ईंधन संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार बताए जा रहे हैं:
- पैनिक बाइंग: सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों ने लोगों में ईंधन खत्म होने का डर पैदा कर दिया, जिससे पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और सामान्य से कहीं अधिक ईंधन की खपत होने लगी ।
- आपूर्ति में व्यवधान: डीलरों का कहना है कि तेल कंपनियों की ओर से नियमित आपूर्ति नहीं मिल पा रही है, जिससे स्टॉक पर दबाव बढ़ गया है और कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा ।
- रणनीतिक मार्ग का बंद होना: 28 फरवरी से ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ प्रभावी रूप से बंद हो गया है, जिससे भारत की ऊर्जा आयात प्रक्रिया प्रभावित हुई है ।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
राज्य और केंद्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है:
- आपातकालीन कार्य योजना: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जिला कलेक्टरों को स्थिति से निपटने के लिए तुरंत कार्य योजना लागू करने और सोमवार शाम तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है ।
- आयात विकल्पों का विस्तार: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत अपने कच्चे तेल के आयात विकल्पों को बढ़ा रहा है और देश के भीतर ईंधन की कोई कमी नहीं है, स्थिति केवल घबराहट के कारण बिगड़ रही है ।
- नियंत्रण के उपाय: कई पेट्रोल पंपों पर अब दोपहिया वाहनों के लिए 2 लीटर और कारों के लिए 10 लीटर पेट्रोल की सीमा निर्धारित कर दी गई है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके ।
हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि बंद हुए अधिकांश पेट्रोल पंप स्टॉक की कमी के कारण नहीं, बल्कि अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों से एहतियातन बंद किए गए थे । आम जनता को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बाइंग से बचें ।





