वरिष्ठ पत्रकार, और पूर्व राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज के आकस्मिक निधन से भारतीय पत्रकारिता, बौद्धिक जगत और राष्ट्रवादी विचारधारा में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। दशकों तक अपनी निर्भीक लेखनी से राष्ट्रवाद, इतिहास के पुनर्लेखन और समसामयिक मुद्दों पर स्पष्टवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करने वाले पुंज जी का निधन 18 अप्रैल की रात को दिल्ली में हुआ। वे 78 वर्ष के थे। उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल @balbirpunj पर उनके समर्थकों ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।
जीवन परिचय और प्रमुख योगदान
बलबीर पुंज का जन्म 1947 में हुआ था। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत ‘पंजाब केसरी’ और ‘आज’ जैसे प्रमुख दैनिकों से की, जहां उनकी कलम ने हमेशा सत्य और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी। 1990 के दशक में राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने संसद में राष्ट्रवादी मुद्दों पर प्रभावी बहस की। उनकी पुस्तकें जैसे ‘भारत का विभाजन: एक पुनरावलोकन’ और ‘नेहरू की गलतियां’ ने इतिहास की व्याख्या को नया आयाम दिया।
वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक और पूर्व राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज @balbirpunj जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) April 19, 2026
उन्होंने दशकों तक अपनी निर्भीक लेखनी और स्पष्ट विचारों के माध्यम से राष्ट्रवाद, इतिहास और समसामयिक मुद्दों पर एक मजबूत वैचारिक दृष्टि दी। उन्होंने बौद्धिक विमर्श को समृद्ध…
पुंज जी ने ऑपइंडिया, प्रभात खबर और अन्य मंचों पर लेखन के माध्यम से वामपंथी इतिहासकारों की आलोचना की और हिंदुत्व की वैचारिक मजबूती पर जोर दिया। सोशल मीडिया पर उनके 2 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे, जहां वे दैनिक टिप्पणियों से युवाओं को प्रेरित करते रहे। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के कारण वे वैचारिक युद्ध के प्रमुख सिपाही माने जाते थे।
पत्रकारिता जगत और राजनीतिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं
निधन की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि की बाढ़ आ गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, “बलबीर पुंज जी की लेखनी ने राष्ट्रवाद को नई ऊर्जा दी। उनका जाना अपूरणीय क्षति है।” पत्रकारों के संगठन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने शोक सभा बुलाई है।
परिवार ने बताया कि अंतिम संस्कार आज दोपहर 3 बजे निगम बोध घाट पर होगा। समर्थक दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से पहुंच रहे हैं। पुंज जी के निधन को सार्वजनिक जीवन के लिए गहन आघात माना जा रहा है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस दुख की घड़ी में संबल दें।
बलबीर पुंज की विरासत उनकी लेखनी और विचारों में जीवित रहेगी, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।






