नई दिल्ली: संसद के हालिया घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। भाजपा की ओर से प्रेस वार्ता में कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे नेता, जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है, उनके बारे में यह कहना कि वे “कांप रहे थे”, तथ्यों से परे है।
प्रवक्ता ने दावा किया कि अमित शाह के नाम से आतंकवादी और नक्सली संगठन भय खाते हैं और ऐसे नेता पर इस प्रकार की टिप्पणी केवल राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश है।
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा का जवाब
भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी देश को गुमराह करने की राजनीति कर रहे हैं। पार्टी के अनुसार, आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की सरकारें रहीं, लेकिन उन्होंने देश के भविष्य से अधिक गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया।
प्रेस वार्ता में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और असम के पुराने आंदोलनों का भी उल्लेख किया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान विभिन्न आंदोलनों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने जैसी घटनाएं हुई थीं।
संसद में ‘माइक बंद’ विवाद पर भी साधा निशाना
भाजपा ने राहुल गांधी के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने सदन में अपना माइक बंद किए जाने की बात कही थी।
प्रवक्ता ने कहा कि सदन में माइक की लाल बत्ती जल रही थी, जो यह दर्शाती है कि माइक्रोफोन चालू था। भाजपा का दावा है कि माइक बंद होने का आरोप वास्तविकता से मेल नहीं खाता और इसे राजनीतिक “विक्टिम कार्ड” के रूप में पेश किया गया।
आर्म्ड फोर्सेस पर लगाए गए आरोपों का किया विरोध
प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा ने विशेष रूप से कांग्रेस नेताओं द्वारा सुरक्षा बलों पर लगाए गए आरोपों का विरोध किया।
भाजपा का कहना था कि संसद में यह कहना कि सुरक्षा बलों ने लड़कियों के कपड़े फाड़े, पूरी तरह असत्य और सेना तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) का मनोबल गिराने वाला बयान है।
पार्टी ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले जवानों के खिलाफ बिना प्रमाण ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है और मीडिया से भी इस विषय को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करने की अपील की।
बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पर भी टिप्पणी
भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रेस वार्ता में कहा गया कि कुछ विपक्षी नेताओं ने बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात बनने की आशंका जताई, जबकि भाजपा का दावा है कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही है।
भाजपा के अनुसार, विपक्ष चुनावी सफलता नहीं मिलने की स्थिति में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी ने यह भी कहा कि जिन आंदोलनों का समाधान हो चुका है, उनके बारे में भी भ्रम फैलाया जा रहा है ताकि लोगों को दोबारा सड़कों पर लाया जा सके।
राहुल गांधी को लेकर भाजपा का दावा
भाजपा ने दावा किया कि राहुल गांधी को संसद में अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया था। पार्टी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार उन्हें बोलने के लिए कहा, लेकिन वे स्वयं बोलने के लिए तैयार नहीं हुए।
भाजपा का कहना है कि संसद में बहस और तीखी चर्चा लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन तथ्यों के बजाय भ्रम फैलाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।
निष्कर्ष
संसद में हुई तीखी राजनीतिक बहस के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। एक ओर भाजपा ने राहुल गांधी के बयानों को भ्रामक बताते हुए उनका खंडन किया है, वहीं कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है। इन दावों और प्रति-दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें संबंधित दलों के राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।