मेरठ: श्रावण मास में पूरे देश में गूंज रहे “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष के बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से आस्था, मानवता और पारिवारिक समर्पण की दो प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं। एक ओर फलावदा कस्बे का एक मुस्लिम युवक भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा के चलते 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर लौट रहा है, तो दूसरी ओर एक बेटा अपनी 81 वर्षीय मां को कांवड़ में बैठाकर उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी कर रहा है।
मुस्लिम युवक शाकिर की शिवभक्ति बनी चर्चा का विषय
मेरठ के फलावदा कस्बे के मोहल्ला होली चौक निवासी मंजूर के 22 वर्षीय बेटे शाकिर ने अपनी अनूठी कांवड़ यात्रा से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले शाकिर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था वर्षों से अटूट बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि शाकिर पिछले तीन वर्षों से नियमित रूप से शिव आराधना कर रहे हैं। पिछले वर्ष उन्होंने हरिद्वार से 101 लीटर गंगाजल लाकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक किया था। इस बार उन्होंने 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई है और अपने गंतव्य की ओर यात्रा कर रहे हैं।
रास्तेभर मिला सम्मान और उत्साहवर्धन
हरिद्वार से लौटते समय रुड़की सहित कई स्थानों पर कांवड़ सेवा शिविरों में मौजूद श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों ने शाकिर का स्वागत किया। जगह-जगह उन्हें सम्मानित किया गया और उनकी श्रद्धा तथा समर्पण की सराहना की गई। सोशल मीडिया पर भी उनकी यात्रा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
मां को कांवड़ में बैठाकर निकला बेटा
इसी कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ की मवाना तहसील के बहादुरपुर गांव के निवासी अमरपाल भी अपनी अनूठी सेवा भावना के कारण चर्चा में हैं। अमरपाल अपनी 81 वर्षीय मां ओमवती को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से यात्रा कर रहे हैं। कांवड़ के एक ओर गंगाजल और दूसरी ओर अपनी मां को बैठाकर वह उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी कर रहे हैं।
इस यात्रा में उनकी बेटी साक्षी और परिवार के अन्य सदस्य भी साथ चल रहे हैं। परिवार का कहना है कि उम्र अधिक होने के कारण ओमवती स्वयं पैदल यात्रा नहीं कर सकती थीं, इसलिए उन्हें कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराने का निर्णय लिया गया।
समरसता और सेवा का संदेश
श्रावण मास की इन दोनों घटनाओं को लोग सामाजिक समरसता, पारिवारिक संस्कार और मानवता की मिसाल के रूप में देख रहे हैं। एक ओर अलग धर्म का युवक भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक बेटा अपनी वृद्ध मां की इच्छा पूरी करने के लिए सेवा का अनूठा उदाहरण पेश कर रहा है।
इन दोनों कहानियों ने कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान, सेवा और भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व भी बना दिया है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय दावों पर आधारित है। संबंधित व्यक्तियों की धार्मिक मान्यताओं और यात्रा से जुड़े विवरणों का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।