नई दिल्ली: भारतीय रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की इस मजबूती के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारकों का असर माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक डॉलर की कमजोरी, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जैसे कारणों ने रुपये को समर्थन दिया है।
रुपये की मजबूती के 5 बड़े कारण
1. डॉलर इंडेक्स में कमजोरी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली है। जब डॉलर कमजोर होता है तो उभरते बाजारों (Emerging Markets) की मुद्राओं को मजबूती मिलती है, जिसका फायदा भारतीय रुपये को भी मिला।
2. विदेशी निवेशकों की खरीदारी
हाल के दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में निवेश बढ़ाया है। विदेशी पूंजी के प्रवाह से डॉलर की आपूर्ति बढ़ती है और रुपये को मजबूती मिलती है।
3. शेयर बाजार में तेजी
घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल और प्रमुख सूचकांकों में तेजी ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। मजबूत बाजार का असर भी रुपये पर सकारात्मक रहा।
4. कच्चे तेल की कीमतों में राहत
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रित रहने से डॉलर की मांग कम होती है और रुपये पर दबाव घटता है।
5. RBI की सक्रिय भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की बाजार में सक्रिय निगरानी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप से भी रुपये को स्थिरता और मजबूती मिली है।
आगे क्या रहेगा रुख?
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, वैश्विक डॉलर की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर निर्भर करेगी। यदि ये कारक अनुकूल बने रहते हैं, तो रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है, हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी।