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सोनम वांगचुक की बिगड़ी तबीयत, 8.5 किलो घटा वजन; अनशन खत्म करने से किया इनकार, बोले- ‘तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाऊंगा’

नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत उनके लंबे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान लगातार बिगड़ रही है। मंगलवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, उनका वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है, जबकि उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया। स्वास्थ्य में गिरावट के बावजूद वांगचुक ने अनशन समाप्त करने से इनकार कर दिया है और कहा है कि वे अपने आंदोलन को उसके “तार्किक निष्कर्ष” तक ले जाएंगे।

क्यों कर रहे हैं भूख हड़ताल?

सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। यह आंदोलन Cockroach Janata Party (CJP) के समर्थन में चल रहा है। संगठन की प्रमुख मांग है कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।

‘सरकार बात करे, तभी समाधान निकलेगा’

समर्थकों और विपक्षी नेताओं की ओर से लगातार अनशन समाप्त करने की अपील के बावजूद वांगचुक अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बातचीत शुरू करती है, तो समाधान का रास्ता निकल सकता है, लेकिन फिलहाल वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

चिकित्सकों के अनुसार, लगातार उपवास के कारण वांगचुक का वजन तेजी से घटा है और मांसपेशियों में भी कमजोरी आ रही है। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए हजारों समर्थकों ने सोशल मीडिया और धरना स्थल पर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। आंदोलन में शामिल कुछ अन्य छात्र कार्यकर्ताओं की तबीयत भी बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

59 वर्षीय सोनम वांगचुक देश के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् हैं। वे ‘आइस स्तूप’ (Ice Stupa) तकनीक विकसित करने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं, जिसके जरिए लद्दाख जैसे शुष्क क्षेत्रों में किसानों के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। उन्हें वर्ष 2018 का रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके अलावा, फिल्म ‘3 इडियट्स’ के चर्चित किरदार फुनसुख वांगडू की प्रेरणा भी उन्हें माना जाता है।

पहले भी रहे हैं चर्चा में

पिछले वर्ष लद्दाख आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। करीब 170 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद इस वर्ष मार्च में उन्हें रिहा कर दिया गया। तब से वे सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर लगातार सक्रिय हैं।

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