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अजब गजब

पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत बोले- ‘जजों को भी कुछ रिसर्च करनी चाहिए’

By riyasingh000043@gmail.com
July 15, 2026 2 Min Read
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नई दिल्ली: पटना हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत के समक्ष यह मामला उठाया गया कि हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा था कि महिला का सलवार उतारने की कोशिश करना और उसकी छाती दबाना अपने-आप में ‘बलात्कार का प्रयास’ (Attempt to Rape) नहीं माना जा सकता, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर यह महिला की शालीनता भंग करने का अपराध हो सकता है। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि “जजों को भी कुछ रिसर्च करनी चाहिए” और यौन अपराधों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है।

क्या था पटना हाईकोर्ट का फैसला?

9 जुलाई को दिए गए फैसले में पटना हाईकोर्ट ने 2008 के एक मामले में आरोपी की बलात्कार के प्रयास से संबंधित सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष बलात्कार के प्रयास के लिए आवश्यक कानूनी तत्व साबित नहीं कर सका। हालांकि, अदालत ने माना कि आरोपित कृत्य महिला की शालीनता भंग करने की श्रेणी में आ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में क्यों उठा मामला?

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने इस फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक समान फैसले पर शीर्ष अदालत हस्तक्षेप कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद ऐसी टिप्पणियां सामने आ रही हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायाधीशों को यौन अपराधों से जुड़े मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (National Judicial Academy) द्वारा तैयार न्यायिक संवेदनशीलता संबंधी दिशानिर्देशों (हैंडबुक) को मंजूरी दी। अदालत ने निर्देश दिया कि यह हैंडबुक सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट और जिला अदालतों की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। साथ ही राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और अभियोजन अधिकारियों को भी इसे FIR दर्ज करने और चार्जशीट तैयार करने के दौरान ध्यान में रखने के निर्देश देने को कहा गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट वाला मामला भी आया चर्चा में

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक विवादित फैसले पर उसने स्वतः संज्ञान लिया था। उस मामले में भी यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। इसी क्रम में विशेषज्ञ समिति बनाकर दिशानिर्देश तैयार कराए गए थे, जिन्हें अब सभी अदालतों में लागू करने की बात कही गई है।

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riyasingh000043@gmail.com

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