नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद सियासी विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। अदालत की टिप्पणी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने तो न्यायिक जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता के खिलाफ तीखी टिप्पणी कर दी। मामला इतना बढ़ गया कि सौरव दास ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर महुआ मोइत्रा के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित बेंच की होगी। उन्होंने यहां तक कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह के व्यवहार वाले जजों को इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने के लिए मजबूर किया जाता है।
आखिर पूरा मामला क्या है?
दरअसल, महुआ मोइत्रा से जुड़े एक फेसबुक पोस्ट के मामले में पुलिस जांच चल रही है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें जांच अधिकारी के सामने पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। महुआ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मांग की गई थी कि उन्हें पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ में शामिल होने की अनुमति दी जाए। उनके वकील ने दलील दी कि पिछली बार पुलिस स्टेशन जाने के दौरान महुआ पर अंडे फेंके गए थे। ऐसे में उन्हें दोबारा वहां जाने पर भीड़ द्वारा निशाना बनाए जाने का डर है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नाग की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान महुआ के वकील ने सुरक्षा संबंधी चिंता सामने रखी। रिपोर्टों के मुताबिक, जस्टिस दत्ता ने सवाल किया कि राजनीति में आने के बाद अंडों से डरने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। सुनवाई के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने उनके संघर्ष और बलिदान का भी जिक्र किया। पीठ के रुख को देखते हुए महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका वापस ले ली गई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस ली गई याचिका के तौर पर खारिज कर दिया।
सौरव दास ने जस्टिस दत्ता पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सामने आने के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट का जज चाहता है कि महुआ मोइत्रा ‘गोलियां खाएं’? दास ने न्यायपालिका में जवाबदेही की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि संवैधानिक अदालतों के जजों से इस तरह के न्यायिक रवैये की उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने आगे दावा किया कि अगर भविष्य में महुआ मोइत्रा के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच जिम्मेदार होगी।
इस्तीफे और महाभियोग तक की बात क्यों आई?
सौरव दास की टिप्पणी में सबसे ज्यादा चर्चा उस हिस्से की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह के जजों को इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि, यह CJP प्रवक्ता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, सुप्रीम कोर्ट की ओर से जस्टिस दीपांकर दत्ता के इस्तीफे या महाभियोग को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल एक राजनीतिक बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या अदालत चाहती है कि हर कोई गोलियां खाए।
महुआ मोइत्रा को हाई कोर्ट से पहले मिल चुकी है राहत
इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को महुआ मोइत्रा को अंतरिम राहत दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 5 अक्टूबर तक दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिली थी, हालांकि जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया था। महुआ की ओर से मामले में लगाए गए आरोपों को गलत बताया गया है। वहीं पुलिस जांच की प्रक्रिया जारी है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट से वर्चुअल पेशी की मांग वापस लिए जाने के बाद महुआ मोइत्रा को जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है। दूसरी तरफ, अदालत की टिप्पणी पर CJP नेताओं की प्रतिक्रिया ने इस मामले को कानूनी विवाद से आगे राजनीतिक बहस का मुद्दा बना दिया है। फिलहाल जस्टिस दीपांकर दत्ता के इस्तीफे की कोई आधिकारिक मांग सुप्रीम कोर्ट या किसी संवैधानिक संस्था की ओर से सामने नहीं आई है। इस्तीफे और महाभियोग वाली बात CJP नेताओं की प्रतिक्रिया तक सीमित है। इस पूरे विवाद में अब नजर इस बात पर रहेगी कि महुआ मोइत्रा की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और CJP नेताओं की ओर से न्यायपालिका को लेकर आगे क्या कदम या बयान सामने आते हैं।