दिल्ली में कहां ठहरे हैं अभिजीत दीपके? दोस्त ने किया बड़ा खुलासा, सिक्योरिटी गार्ड का दावा- सादे कपड़ों में आती है पुलिस

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके को लेकर एक नया खुलासा सामने आया है। उनके एक करीबी दोस्त ने दावा किया है कि अभिजीत इन दिनों दिल्ली के एक निजी गेस्ट हाउस में ठहरे हुए हैं। वहीं, गेस्ट हाउस के सिक्योरिटी गार्ड का कहना है कि वहां समय-समय पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी आते-जाते दिखाई देते हैं। हालांकि, पुलिस या प्रशासन की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

दोस्त ने क्या बताया?

अभिजीत दीपके के एक करीबी मित्र ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के एक गेस्ट हाउस में रह रहे हैं। उनके अनुसार, आंदोलन और बैठकों के कारण अभिजीत लगातार लोगों से मिल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनके ठहरने की जगह को सार्वजनिक नहीं किया गया था।

दोस्त का कहना है कि आंदोलन से जुड़े कई लोग उनसे मिलने वहां पहुंचते हैं और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आने-जाने वालों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

सिक्योरिटी गार्ड का दावा

गेस्ट हाउस के एक सिक्योरिटी गार्ड ने दावा किया कि कई बार सादे कपड़ों में कुछ लोग वहां आते हैं, जिनके बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि वे पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े हो सकते हैं। गार्ड ने यह भी कहा कि इन लोगों की आवाजाही सामान्य वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की तरह नहीं होती।

हालांकि, यह केवल गार्ड का दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पुलिस की ओर से क्या कहा गया?

अब तक दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस ने न तो अभिजीत दीपके की निगरानी की बात स्वीकार की है और न ही इन दावों का खंडन किया है।

आंदोलन के बीच बढ़ी हलचल

जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के कारण अभिजीत दीपके लगातार चर्चा में बने हुए हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं और समर्थकों की लगातार आवाजाही के चलते सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई है। ऐसे में उनके ठहरने की जगह को लेकर सामने आए दावों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल, अभिजीत दीपके के ठहरने की जगह और वहां कथित रूप से सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर सामने आए दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आने वाले समय में पुलिस या संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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