नई दिल्ली: देश में आरक्षण को लेकर बहस एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। पिछले कुछ दिनों में नागपुर, लखनऊ, जयपुर और विशाखापत्तनम समेत कई शहरों में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी ‘Reservation Hatao Andolan (RHA)’ नाम से अभियान तेजी से फैल रहा है। इस बीच श्री राजपूत करणी सेना ने भी भाजपा के खिलाफ नाराजगी जताते हुए आगामी चुनावों में वोट नहीं देने की चेतावनी दी है।
कई शहरों में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी
रिपोर्टों के अनुसार, आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों और युवाओं ने कई राज्यों में प्रदर्शन किए। महाराष्ट्र के नागपुर में हाल ही में आंदोलन की पहली बड़ी रैली आयोजित हुई, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। आंदोलन से जुड़े लोग शिक्षा, सरकारी नौकरियों और अन्य क्षेत्रों में मौजूदा आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ा अभियान
आरक्षण विरोधी अभियान केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर Reservation Hatao Andolan (RHA) के नाम से चल रहा अभियान लाखों लोगों तक पहुंच चुका है। आंदोलन से जुड़े समर्थक मेरिट आधारित व्यवस्था और आय आधारित आरक्षण जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। हालांकि, इस अभियान के विरोध में भी कई आवाजें सामने आ रही हैं, जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को सामाजिक न्याय के लिए जरूरी बता रही हैं।
करणी सेना की भाजपा को चेतावनी
राजस्थान में श्री राजपूत करणी सेना ने हालिया प्रदर्शन के दौरान भाजपा के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। संगठन के नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा का समर्थन नहीं करेंगे। जयपुर में आयोजित विरोध मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव भी देखने को मिला, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों और हल्के बल का इस्तेमाल किया।
राजनीतिक दलों की नजर आंदोलन पर
आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील विषयों में माना जाता है। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दल फिलहाल इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंदोलन का दायरा और बढ़ता है, तो इसका असर कई राज्यों की चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है।
आरक्षण पर देश में दो अलग-अलग राय
जहां एक ओर आरक्षण विरोधी समूह मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि आरक्षण ऐतिहासिक और सामाजिक असमानताओं को दूर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में यह बहस आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल स्थिति क्या है?
फिलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में आरक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आंदोलन से जुड़े संगठनों ने आगे भी कार्यक्रम आयोजित करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस आंदोलन या आरक्षण नीति में किसी बदलाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।