नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया दावा तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ पोस्टों में कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों के लिए बांग्लादेश से भोजन भेजा जा रहा है और यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है।
इन पोस्टों में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि प्रदर्शन को विदेशी समर्थन और फंडिंग मिल रही है। हालांकि, इन दावों की अब तक किसी सरकारी एजेंसी या जांच एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं दावे
वायरल पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन के लिए भोजन और अन्य संसाधनों की व्यवस्था विदेश से की जा रही है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि आंदोलन के पीछे बाहरी समर्थन मौजूद है।
हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज, जांच रिपोर्ट या सरकारी बयान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है।
🇧🇩 बांग्लादेश से जंतर मंतर पर प्रोटेस्टर्स के लिए खाना भेजा जा रहा है!
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 22, 2026
प्रोटेस्ट अब NEET से आगे निकल चुका है। विदेशी सपोर्ट और फंडिंग के साथ ये तमाशा चल रहा है।
देश देख रहा है… ये किसकी साजिश है?#JantarMantar #BangladeshFood #ProtestExposed pic.twitter.com/Sr7dTvKbtb
जांच एजेंसियों की नजर
यदि किसी प्रदर्शन में विदेशी फंडिंग या विदेशी स्रोतों से किसी प्रकार की सहायता मिलने की आशंका होती है, तो इसकी जांच संबंधित केंद्रीय और राज्य एजेंसियां कानून के अनुसार करती हैं। जांच पूरी होने के बाद ही किसी दावे की पुष्टि या खंडन किया जा सकता है।
फिलहाल संबंधित एजेंसियों की ओर से बांग्लादेश से भोजन भेजे जाने या विदेशी फंडिंग के संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है।
अफवाहों से बचने की अपील
विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी दावे को सत्यापित किए बिना सच मानना उचित नहीं है। नागरिकों को केवल आधिकारिक बयान, जांच रिपोर्ट या विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
- सोशल मीडिया पर बांग्लादेश से भोजन भेजे जाने का दावा वायरल है।
- इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
- किसी सरकारी एजेंसी ने अब तक इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
- विदेशी फंडिंग या बाहरी सहायता से जुड़े किसी भी आरोप की पुष्टि केवल सक्षम जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही की जा सकती है।