नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के बीच खाना और पानी वितरित करने को लेकर चर्चा में आए मोहम्मद जुनैद ने अपनी कथित गुमशुदगी को लेकर बड़ा दावा किया है। एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में जुनैद ने आरोप लगाया कि उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था और करीब 17–18 घंटे बाद उत्तराखंड के मसूरी में छोड़ दिया गया।
हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से इस दावे की पुष्टि या खंडन करते हुए कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए जुनैद के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस्तीफे के जश्न में नहीं दिखे जुनैद
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर आंदोलन से जुड़े लोगों ने जश्न मनाया था। उस दौरान जुनैद के मौजूद नहीं रहने पर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई गईं। अब उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की वजह कथित पुलिस हिरासत को बताया है।
“रेबीज का टीका लगवाने गया था”
जुनैद के अनुसार, 24 जुलाई की रात उन्हें एक कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद वह रात करीब 11 बजे राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में रेबीज का टीका लगवाने पहुंचे।
उन्होंने दावा किया कि अस्पताल से निकलने के बाद वह अपने एक साथी के साथ ऑटो से जा रहे थे, तभी एक सफेद स्कॉर्पियो ने उनका रास्ता रोक लिया।
“खुद को दिल्ली पुलिस बताया”
जुनैद का कहना है कि गाड़ी से उतरे लोगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का बताया और पहचान पत्र भी दिखाया, लेकिन उनके चेहरे ढके हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद उन्हें और उनके साथी को अपने साथ ले जाया गया।
आंखों पर पट्टी बांधने का दावा
जुनैद ने बताया कि उन्हें वाहन में बैठाने के बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई और किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। उनके मुताबिक, उन्हें एक इमारत की दूसरी मंजिल पर रखा गया, जहां उन्होंने पूरी रात बिताई।
उन्होंने कहा कि अगले दिन कुछ अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की और बाद में उन्हें छोड़ने का निर्णय लिया गया। उनका दावा है कि रिहा करते समय भी उनकी आंखों पर पट्टी बंधी रही और करीब 4 से 6 घंटे तक सफर कराने के बाद जब पट्टी हटाई गई तो उन्होंने खुद को मसूरी में पाया।
“मारपीट नहीं हुई”
जुनैद ने यह भी दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं की गई। उनके अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अच्छा व्यवहार किया और वही भोजन दिया जो वे स्वयं खा रहे थे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता और ससुराल पक्ष के कुछ लोगों को भी पूछताछ के लिए ले जाया गया था।
पेशे से वकील, सरकारी नौकरी की तैयारी
इंटरव्यू में जुनैद ने बताया कि वह पेशे से वकील हैं और साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 20 जून को जब जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू हुआ, उस दिन वह एक प्रतियोगी परीक्षा देने गए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद वह जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान देखा। इसके बाद उन्होंने स्वयं पानी की व्यवस्था शुरू की और धीरे-धीरे अन्य लोगों के सहयोग से खाने-पीने की व्यवस्था भी होने लगी।
फंडिंग से किया इनकार
जुनैद ने किसी भी प्रकार की आर्थिक फंडिंग मिलने के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि उन्होंने न तो किसी से नकद राशि ली और न ही ऑनलाइन भुगतान स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि जो लोग मदद करना चाहते थे, उनसे केवल पानी, बिस्किट, दवाइयों या खाने जैसी आवश्यक सामग्री लाने का आग्रह किया जाता था। उनके मुताबिक, आंदोलन के दौरान भोजन और पानी की व्यवस्था कई लोगों के सहयोग से चलती रही।
सोशल मीडिया पर आंदोलन के दौरान प्रतिदिन ₹5 से ₹7 लाख खर्च होने के दावे भी किए गए हैं। हालांकि, इन दावों की किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।
CJP नेतृत्व से संपर्क नहीं होने का दावा
जुनैद ने कहा कि कथित हिरासत के कारण वह जश्न में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद उनकी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके या अन्य शीर्ष नेताओं से सीधी बातचीत नहीं हो पाई।
हालांकि, उनके अनुसार संगठन की लीगल टीम से जुड़ी रत्ना ने उनसे फोन पर संपर्क किया और कानूनी सहायता का भरोसा दिया।
जुनैद ने कहा कि वह चाहते हैं कि पूरे मामले की पैरवी के लिए संगठन एक पूर्ण कानूनी टीम गठित करे।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
जुनैद द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस, CJP या संबंधित अन्य पक्षों की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला फिलहाल एक पक्ष के दावों पर आधारित है। यदि संबंधित पक्षों की ओर से कोई बयान जारी किया जाता है, तो उससे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।