क्या दो दिन में खराब हो गई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन? वायरल वीडियो पर रेलवे ने बताई पूरी सच्चाई
नई दिल्ली: भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ट्रेन को एक डीजल इंजन खींचता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसके बाद दावा किया जाने लगा कि लॉन्च के महज दो दिन के भीतर ही हाइड्रोजन ट्रेन खराब हो गई। हालांकि, भारतीय रेलवे ने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।
क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो में दावा किया गया कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तकनीकी खराबी का शिकार हो गई और उसे डीजल इंजन की मदद से खींचना पड़ा। इसी आधार पर कई यूजर्स ने परियोजना की सफलता पर सवाल उठाए।
वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर एक और दावा किया जा रहा है जिसके अनुसार तो यह कहा जा रहा है कि हाइड्रोजन ट्रेन पर हमले का यह वीडियो सामने आया है और हमला करने वाला कहीं CJP के समर्थक तो नहीं है. हालांकि वायरल इस दावे का कितना सत्य है इस बात की कोई भी सत्यता अभी तक सामने नहीं आई है.
हाइड्रोजन ट्रेन पर हमले का ये वीडियो सामने आया है।
— Panchjanya (@epanchjanya) July 20, 2026
हमला करने वाले कहीं CJP के समर्थक तो नहीं… pic.twitter.com/1JVwRIy7Qw
रेलवे ने क्या कहा?
उत्तरी रेलवे ने इस दावे पर सफाई देते हुए कहा कि वायरल वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन केवल हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट पर होता है। रखरखाव (Maintenance) के लिए ट्रेन को वर्कशॉप तक लाने और ले जाने में डीजल लोकोमोटिव का इस्तेमाल मानक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) का हिस्सा है। इसका ट्रेन में किसी तकनीकी खराबी से कोई संबंध नहीं है।
क्यों लगाया जाता है डीजल इंजन?
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जब ट्रेन को मेंटेनेंस डिपो तक पहुंचाना होता है या वहां से वापस लाना होता है, तब सुरक्षा और परिचालन कारणों से लोकोमोटिव की सहायता ली जाती है। यह प्रक्रिया नई तकनीक वाली ट्रेनों के साथ भी सामान्य रूप से अपनाई जाती है। इसलिए डीजल इंजन का दिखाई देना किसी खराबी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। यह ट्रेन जींद–सोनीपत रूट पर चल रही है और हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से बिजली पैदा करती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है, जिससे यह पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।
निष्कर्ष
वायरल वीडियो के आधार पर यह कहना कि हाइड्रोजन ट्रेन दो दिन में खराब हो गई, सही नहीं है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि डीजल इंजन से ट्रेन को खींचना केवल मेंटेनेंस प्रक्रिया का हिस्सा था, न कि किसी तकनीकी खराबी का परिणाम। ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
Jo Log Tatkaleen Sarkaar ki kaamo ko dekh achambhit hain aur sarkaar ki uplabhdiyyo se unka vote bank gir rahha hain is karaan sarkaar ko neecha dikhabey ki liyye aur desh aur sarkaar ki saakh ko giraaney ka kaam ker rahhey desh vasiyyo ko apney desh ki Pm per aur sarkaar per attot vishvaas honna chahhiyye desh hit is sarkaar ki liyye sarvopari hain desh se badhkar koi padd nahi Jai Hind