नई दिल्ली: नीट परीक्षा विवाद को लेकर चले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बाद अब सोशल मीडिया पर एक और बड़ा जन-अभियान तेजी से चर्चा में है। ‘Reservation Hatao Andolan (RHA)’ नाम से चल रहे इस ऑनलाइन अभियान ने कम समय में इंस्टाग्राम पर 46 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटाने का दावा किया है। इसके बाद आरक्षण नीति, जातिगत पहचान और सामाजिक न्याय को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
खुद को पूरी तरह गैर-राजनीतिक नागरिक आंदोलन बताने वाला यह संगठन कहता है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि आरक्षण व्यवस्था पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू करना है।
आंबेडकर के नारे को बनाया अभियान का आधार
इंस्टाग्राम पर reservationhataomovement नाम से मौजूद इस पेज पर 109 पोस्ट साझा की गई हैं। संगठन ने अपनी प्रोफाइल में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे “Educate, Agitate, Organize” (शिक्षित बनो, आंदोलन करो, संगठित हो) को अपनाया है। इसके साथ हिंदी में लिखा गया है, “सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान”, जबकि प्रोफाइल का समापन “जय हिंद” के संदेश से किया गया है।
राजनीतिक दलों से दूरी का दावा
संगठन ने अपनी एक पोस्ट में स्पष्ट किया है कि उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। अभियान का कहना है कि आरक्षण का मुद्दा किसी सरकार या पार्टी का नहीं, बल्कि सार्वजनिक नीति का विषय है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
संगठन का दावा है कि यह पूरी तरह आम नागरिकों द्वारा संचालित स्वतंत्र अभियान है, जिसका उद्देश्य नीति स्तर पर चर्चा को आगे बढ़ाना है।
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?
अभियान का कहना है कि यदि देश से जातिगत भेदभाव समाप्त करना है तो सरकारी व्यवस्था में जाति आधारित पहचान को धीरे-धीरे खत्म करने पर विचार होना चाहिए।
संगठन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- सरकारी दस्तावेजों में जाति का उल्लेख अनिवार्य न किया जाए।
- स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में जाति पूछने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
- सार्वजनिक जीवन में जातिगत पहचान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार किया जाए।
- “एक देश, एक पहचान – भारतीय” की अवधारणा को लागू किया जाए।
अभियान का प्रमुख नारा है— “आरक्षण हटाओ, जातिवाद हटाओ।”
CJP के बाद बढ़े सोशल मीडिया आधारित अभियान
पिछले दिनों CJP के 49 दिनों तक चले आंदोलन और उस पर सरकार की प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया आधारित जन-अभियानों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में हाल ही में E20 जनता पार्टी नाम से एक अन्य ऑनलाइन अभियान भी सामने आया है।
यह समूह एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) नीति का विरोध कर रहा है और मांग कर रहा है कि उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत पेट्रोल खरीदने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। साथ ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की जा रही है।
इसी बीच दिल्ली के टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स संगठनों ने 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
सोशल मीडिया बन रहा जन-अभियानों का नया मंच
हाल के महीनों में यह स्पष्ट हुआ है कि युवाओं और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया केवल चर्चा का मंच नहीं रह गया है, बल्कि बड़े जन-अभियानों की शुरुआत का माध्यम भी बनता जा रहा है। CJP के बाद RHA और E20 जैसे अभियान इसी बदलते डिजिटल परिदृश्य की ओर संकेत करते हैं।
हालांकि, इन अभियानों के दावों, सदस्य संख्या और प्रभाव का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये ऑनलाइन मुहिम केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहती हैं या फिर जन-आंदोलन और नीति-निर्माण की प्रक्रिया तक भी प्रभाव डालती हैं।