नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपने आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने की दिशा में कदम बढ़ाती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की है। इस बैठक के बाद किसानों और छात्रों के बीच संभावित तालमेल तथा साझा आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भविष्य की रणनीति पर हुई चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैठक में CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका सहित संगठन के अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे। बातचीत के दौरान किसानों, छात्रों और युवाओं को एक साझा मंच पर लाकर विभिन्न मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाने पर चर्चा हुई। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आशुतोष रांका ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि देश के किसान, छात्र और युवा मिलकर सरकार के सामने अपने मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।
पहले भी आंदोलन को मिला था टिकैत का समर्थन
यह पहली बार नहीं है जब राकेश टिकैत ने CJP के आंदोलन का समर्थन किया हो। इससे पहले भी वह जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में किसानों के साथ पहुंचे थे और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था।
राजस्थान में महापंचायत की तैयारी
इसी बीच, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने राजस्थान के अलवर जिले के सरिस्का क्षेत्र में 30 जुलाई को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की है। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा होगी।
सरकार के खिलाफ आगे की रणनीति
CJP नेतृत्व पहले भी संकेत दे चुका है कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा। हाल के दिनों में संगठन ने सरकार के साथ हुई वार्ताओं में किए गए आश्वासनों को लिखित रूप देने, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में नई एफआईआर दर्ज नहीं करने जैसी मांगें दोहराई हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है।
गठबंधन पर अभी नहीं हुई आधिकारिक घोषणा
फिलहाल, CJP और भारतीय किसान यूनियन के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक या संगठनात्मक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, दोनों पक्षों की बैठक ने यह संकेत जरूर दिया है कि आने वाले समय में छात्र और किसान संगठनों के बीच मुद्दा-आधारित सहयोग बढ़ सकता है। आगे की रणनीति पर अंतिम फैसला संबंधित संगठनों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।