इस AI को अब पूरी दुनिया बोल रही है आठवा अजूबा जो बता रहा है भविष्य जाने कैसे।

वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना ली है। अब इसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर तकनीक की मदद से सेंट्रल रिसर्च सेंटर हिसार देश में पहली बार भैंसों में सेंसर लगाने की योजना पर काम कर रहा है. भैंस में यह सेंसर लगने के बाद किसान और भैंस पालक यह पता लगा सकेंगे कि उनकी भैंस बीमार पड़ने वाली है या उसकी सेहत में कोई बदलाव होने वाला है।

इससे पता चल जाएगा कि वह गर्भधारण के लिए तैयार है या नहीं और अगर उसके शरीर में कोई रासायनिक परिवर्तन हो रहा है तो इसकी जानकारी किसानों को उनके मोबाइल पर ही मिल जाएगी।

जब लोकल 18 ने सीआईआरबी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अशोक बल्हारा से बात की तो उन्होंने बताया कि मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए ही किसानों को जानवरों की समस्याओं का समाधान पता चल जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर सीआईआरबी हिसार के निदेशक डॉ. टीके दत्ता के नेतृत्व और संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अशोक बलहारा की देखरेख में 1 अप्रैल 2024 से काम शुरू किया जाएगा।

इस वर्ष तक योजना पूरी हो जायेगी

आगे डॉ. अशोक बलहारा ने कहा कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन इस प्रोजेक्ट के लिए सीआईआरबी को 15 करोड़ रुपये देगा और सीआईआरबी के वैज्ञानिक आईआईटी रोपड़ और ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे, जिसकी योजना 2029 तक पूरी हो जाएगी. यह परियोजना भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व की 56 प्रतिशत भैंसें भारत में हैं और देश की दूध की आवश्यकता मुख्य रूप से भैंसों के दूध से ही पूरी होती है।

आपको भैंसों की गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी

लोकल 18 को अधिक जानकारी देते हुए मुख्य वैज्ञानिक ने बताया कि भैंसों के लिए तैयार किए गए सेंसर के जरिए मोबाइल से ही भैंसों की गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जा सकेगी. यह मोबाइल CIRB के सर्वर से जुड़ा होगा और यह सर्वर क्लाउड कंप्यूटर से जुड़ा होगा और AI बेस एप्लिकेशन से जुड़ा होगा, जिसमें सभी डेटा एकत्र और विश्लेषण किया जाएगा।

उसके आधार पर पशुपालकों को विभिन्न समस्याओं का समाधान दिया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य पशुपालकों की लागत कम करके पशुओं की उत्पादकता बढ़ाना है। इस सेंसर के जरिए पहले ही पता चल जाएगा कि कौन सी भैंस बीमार पड़ने वाली है और उसके व्यवहार में क्या बदलाव आ रहा है। इस तकनीक के जरिए पशुपालन में क्रांति आ जाएगी.

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