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मौलवियों के लिए 9.5 करोड़ और पंडितों के लिए ‘निल बट्टे सन्नाटा ‘ – rti में खुलासा

दिल्ली सरकार हमेशा से ही सुर्खियों में रही है अपने कामों की वजह से या फिर अपने विज्ञापनों की वजह से, यही नहीं बल्कि मौलानाओं को वेतन देने की वजह से भी! जानकारी है प्राप्त हो रही है कि केजरीवाल की सरकार के द्वारा दिल्ली में मौलानाओं को प्रतिवर्ष ₹90000000 का वेतन दिया जा रहा है! यह दावा कोई राजनीतिक नहीं है अपितु आरटीआई के द्वारा किया गया! लेकिन वही इसके विपरीत यदि मंदिर के पुजारियों की बात करें तो मोदी सरकार की जेब से उनके लिए एक फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं की गई है!

वही हाल ही में पार्थ कुमार नाम के एक शख्स के द्वारा डाली गई आरटीआई के जवाब में बड़ा खुलासा हुआ है कि केजरीवाल सरकार प्रतिवर्ष मौलानाओं के वेतन के लिए 9 करोड़ 34 लाख रुपए खर्च करते हैं! दरअसल आरटीआई का जवाब बताता है कि साल 2015-16 से ही दिल्ली सरकार मौलानाओं को वेतन दे रखी है और खास बात तो यह है कि वेतन पहले करीब 2 से 4 करोड के बीच ही सिमट जाया करता था लेकिन 2020-21 तक आकड़ा 9 करोड रुपए से अधिक हो चुका है! संभावना यह है कि इस वित्त वर्ष तक यह नया आंकड़ा साढ़े 9 करोड़ हो सकता है!

वही ऐसे मैं अभी इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली से नेता हरीश खुराना ने केजरीवाल सरकार के ऊपर निशाना साधा है उन्होंने इस आरटीआई के जवाब की कॉपी ट्वीट करते हुए लिखा कि मित्रों क्या आपको मालूम है कि अरविंद केजरीवाल के पास मौलवियों को वेतन देने के लिए साढ़े 9 करोड़ हर साल के लिए हैं लेकिन मंदिर के पुजारी को देने के लिए एक पैसा भी नहीं है आरटीआई की जानकारी के अनुसार दिल्ली के मुख्यमंत्री के द्वारा प्रतिवर्ष मौलवियों को साढ़े 9 करोड़ की सैलरी के रूप में दी जाती है!

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