बॉलीवुड

सगाई के दिन सायरा बानो को छोड़कर किस लड़की के लिए चले गए थे दिलीप कुमार, सायरा बानो ने खुद बयां किया दास्तां

हम आपको बता दे की दिलीप कुमार ने 1944 में आई फिल्म ज्वार भाटा से डेब्यू किया था. लेकिन उन्हें पहचान 1947 में आई फिल्म जुगनू से मिली थी, उन्होंने आन, नया दौर, अंदाज, राम और श्याम, मुगल-ए-आजम, बैगार, गोपी, क्रांति, शक्ति, मशाल, कर्मा, सौदागर जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया.

बड़े पर्दे पर ट्रेजडी किंग के नाम से फेसम दिलीप कुमार की कल 99वीं बर्थ एनिवर्सी थी। हम आपको बता दे की उनका जन्म 11 दिसंबर 1922 को पेशावर, पाकिस्तान में हुआ था। अपने बॉलीवुड करियर में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले दिलीप कुमार जी के अफेयर के किस्से भी कुछ कम नहीं रहे है। बता दे कि उनका नाम कई हीराइनों के साथ जुड़ा लेकिन उन्होंने खुद से 22 साल छोटी सायरा बानो के साथ शादी रचा कर उनको अपनी जीवन साथी बनाया। उन दोनों के बीच प्यार, विश्वास और एक खास बॉन्डिंग देखने को मिलती थी. आपको बता दे की इसी साल जुलाई में उनका निधन हो गया था। वैसे, हम आपको बता दें कि इनकी जिंदगी एक समय ऐसा भी आया था की जब सगाई वाले दिन दिलीप कुमार मंगेतर सायरा बानो को छोड़कर चले

गौरतलब है कि एक इंटरव्यू में सायरा बानो ने कई सवालों का जवाब दिए थे और अपनी लाइफ के बारे में खुलकर मीडिया से बात की थी। बात करते हुए उन्होंने बताया था- जब मेरे भाई सुल्तान और मैं इंग्लैंड में पढ़ते थे, मेरी मां नसीम बानो हमें यूरोप में छुट्टी मनाने के लिए ले जाती थीं, हमारी छुट्टियां जुलाई में शुरू होती थी और वो हमें यूरोप घुमाकर फिर हमे भारत लाती थीं। मैंने दिलीप साहब की फिल्म आन को लंदन में देखा था, और मैंने उन्हें पहली बार मुंबई के महबूब स्टूडियो में देखा था। ये महबूब खान की पार्टी थी, जहां मैं उनसे मिली। वह आगे कहती है कि यहां मैं उनको देखते ही तुरंत उनके प्यार में पड़ गयी थी और उस समय मैं सिर्फ 12 साल की थी.

इसी कड़ी में सायरा बानो आगे कहती है कि – हम दोनों अपने करियर में एक दूसरे को सेटल कर चुके थे। दिलीप साहब ने वास्तव में जितनी फिल्में कीं, उससे बहुत कम फिल्में मैंने कीं। उनके साथ मुझे एडजस्ट करने में कोई मुश्किल नहीं थी। दिलीप साहब जमीन से जुड़े हुए व्यक्तित्व वाले इंसान है.

वह एक किस्सा बताते हुए कहती है कि एक लड़की थी जो कथित तौर पर दिलीप साहब की प्रेमिका थी और उसने हमारी सगाई के दिन नींद की गोलियां ले लीं थी. जब रिपोर्टर ने पूछा कि क्या आप ऐसी बातों से असुरक्षित महसूस करती थीं? इसका जबाब देते हुए उन्होंने कहा था- जिस दिन हमारी सगाई थी, एक लड़की जो उनकी गर्लफ्रेंड थी, नींद की गोलियां खा लेती है. दिलीप साहब को उसके पास जाना पड़ा और उसे समझाना पड़ा था कि वो मुझसे प्यार करते हैं, उन्होंने उसे शांत किया और सगाई समारोह में वापस आ गए .

हम आपको बता दे की दिलीप कुमार ने 1944 में आई फिल्म ज्वार भाटा से डेब्यू किया था. लेकिन उन्हें पहचान 1947 में आई फिल्म जुगनू से मिली थी, उन्होंने आन, नया दौर, अंदाज, राम और श्याम, मुगल-ए-आजम, बैगार, गोपी, क्रांति, शक्ति, मशाल, कर्मा, सौदागर जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया.

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