उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी अबरार जमाल ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने उत्तराखंड में UCC लागू होने का स्वागत करते हुए इसकी व्यवस्था पूरे देश में लागू करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और आधुनिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
“मदरसों में आधुनिक शिक्षा की भी जरूरत”
कारी अबरार जमाल ने कहा कि समय के साथ मदरसा शिक्षा में बदलाव जरूरी है। उनके अनुसार, धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, सामान्य ज्ञान और रोजगारपरक विषय भी पढ़ाए जाने चाहिए, ताकि वे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि मदरसों से निकलने वाले युवाओं को समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाना चाहिए।
UCC पर क्या कहा?
कारी अबरार जमाल ने दावा किया कि उनकी संस्था शुरू से ही समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करती रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में UCC लागू होना एक सकारात्मक कदम है और अन्य राज्यों सहित पूरे देश में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, एक समान कानून लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को तलाक और हलाला जैसे मुद्दों से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है। यह उनके विचार हैं।
मदरसों में राष्ट्रवाद पर दिया जोर
कारी अबरार जमाल ने कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि मदरसों में आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है। हालांकि, उनका मानना है कि वहां राष्ट्रवाद की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि मदरसों में देशभक्ति और राष्ट्रीय मूल्यों पर भी जोर दिया जाए तो वहां से निकलने वाले छात्र देश सेवा के लिए प्रेरित होंगे।
संसद और लोकतंत्र पर भी रखी राय
कारी अबरार जमाल ने संसद की कार्यवाही में लगातार व्यवधान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संसद जनता के मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और सभी राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक तरीके से संवाद करना चाहिए। लगातार हंगामे से लोकतंत्र और जनता दोनों का नुकसान होता है।
निष्कर्ष
कारी अबरार जमाल के बयान ने UCC और मदरसा शिक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने एक ओर देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने की वकालत की, वहीं दूसरी ओर मदरसों में आधुनिक और राष्ट्रवादी शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही। फिलहाल यह उनके सार्वजनिक विचार हैं और इस संबंध में केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई नई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
Disclaimer: यह समाचार सार्वजनिक रूप से दिए गए बयानों पर आधारित है। UCC को लेकर विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक समूहों की अलग-अलग राय हो सकती है। यह लेख किसी पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं करता, बल्कि उपलब्ध जानकारी को तथ्यात्मक रूप में प्रस्तुत करता है।