नई दिल्ली: देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) के इस्तेमाल को लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ने E20 ईंधन नीति, कमर्शियल वाहनों से जुड़े नियमों और अन्य मांगों को लेकर 4 अगस्त को संसद मार्च करने की घोषणा की है।
शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट और अन्य पदाधिकारियों ने मीडिया के सामने अपनी मांगें रखीं। इस दौरान उन्होंने विरोध के प्रतीक के रूप में हाथों में गन्ना लेकर प्रदर्शन किया और कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक रहेगा।
E20 पेट्रोल पर क्या हैं ट्रांसपोर्टरों की आपत्तियां?
एसोसिएशन का दावा है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से कई वाहन चालकों को माइलेज में कमी और इंजन के रखरखाव का खर्च बढ़ने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
संजय सम्राट ने कहा कि 2015 से पहले निर्मित अधिकांश वाहन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। उनका कहना है कि जब उपभोक्ता पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहे हैं, तो उन्हें ऐसा ईंधन क्यों दिया जा रहा है जो सभी वाहनों के लिए समान रूप से अनुकूल नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि E20 नीति की स्वतंत्र, निष्पक्ष और वैज्ञानिक समीक्षा कराई जाए, जिसमें वाहन निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, उपभोक्ता संगठनों और वाहन मालिकों को भी शामिल किया जाए।
स्पीड लिमिट और स्क्रैपेज नीति पर भी उठे सवाल
एसोसिएशन के सदस्य जितेंद्र बॉबी ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (AITP) वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि आधुनिक एक्सप्रेसवे और हाईवे पर निजी वाहनों को अधिक गति की अनुमति है, जबकि कमर्शियल टूरिस्ट टैक्सियों और बसों पर 80 किमी/घंटा की सीमा लागू होने से कारोबार, समय और यात्रियों की सुविधा प्रभावित हो रही है।
ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांगें
एसोसिएशन ने सरकार के सामने छह प्रमुख मांगें रखी हैं—
- E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की स्वतंत्र वैज्ञानिक और तकनीकी समीक्षा।
- पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) प्रणाली के क्रियान्वयन और कथित अनियमितताओं की जांच।
- ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाहनों के लिए 80 किमी/घंटा स्पीड लिमिट पर पुनर्विचार।
- व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी की समीक्षा।
- BS-IV डीजल टूरिस्ट वाहनों पर लागू प्रतिबंधों में राहत।
- राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स में कमी।
4 अगस्त को संसद मार्च
एसोसिएशन ने बताया कि 4 अगस्त को दिल्ली में संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन का कहना है कि इस आंदोलन का किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और यह केवल टैक्सी, टूरिस्ट वाहन चालकों तथा ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों की समस्याओं को उठाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
संगठन ने देशभर की टैक्सी, कैब, बस और ट्रक यूनियनों से भी इस प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। उनका दावा है कि हजारों चालक और वाहन मालिक इस मार्च में भाग ले सकते हैं।
सरकार का पक्ष
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्तावित संसद मार्च या एसोसिएशन की मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि सरकार का कहना रहा है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं ट्रांसपोर्ट संगठन इन नीतियों के व्यावहारिक प्रभावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रहे हैं।