नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदारों को बड़ी राहत देते हुए मकान मालिकों के लिए सख्त नियम बनाए हैं। कोर्ट का फैसला है कि मकान मालिक बिना उचित नोटिस के किरायेदारों को बेदखल नहीं कर सकते। यह निर्णय करोड़ों किरायेदारों के लिए खुशी की खबर है, जबकि मकान मालिक हैरान हैं। सुप्रीम कोर्ट किरायेदार फैसला रेंट कंट्रोल एक्ट को मजबूत करता है और संपत्ति विवादों में नया आयाम जोड़ता है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि बेदखली से पहले कम से कम 3-6 महीने का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। कारण वैध होना चाहिए, जैसे किराया बकाया या संपत्ति का निजी उपयोग। बिना अदालती आदेश के कोई जबरन कार्रवाई अवैध मानी जाएगी। लंबे समय से रह रहे किरायेदारों को विशेष सुरक्षा मिलेगी। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में रहने वाले नौकरीपेशा लोग अब ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे।
मकान मालिक संगठन इस फैसले से नाराज हैं। उनका तर्क है कि इससे उनके अधिकार कमजोर हो गए। सालाना किराया वृद्धि 5-10% तक सीमित रहेगी और बेदखली प्रक्रिया लंबी चलेगी। हालांकि, मकान मालिकों को वैकल्पिक मुआवजे का विकल्प मिलेगा। वकीलों का कहना है कि यह नया रेंटल एग्रीमेंट 2026 को बदल देगा। सोशल मीडिया पर किरायेदार खुशी जता रहे हैं और मना रहे हैं कि अब मनचाही बेदखली का डर नहीं।
यह फैसला भारतीय किरायेदार कानून में मील का पत्थर साबित होगा। किरायेदारों को सलाह है कि नया रेंट एग्रीमेंट बनवाएं और नोटिस मिलने पर तुरंत वकील से संपर्क करें। मकान मालिक कानूनी प्रक्रिया अपनाएं ताकि विवाद न बढ़े। (स्रोत: सुप्रीम कोर्ट जजमेंट, 2026)






